Wednesday, 19 April 2023

जीवन की डगर

कभी छांव का सुकून तो कभी धूप की तपन,

कुछ ऐसी ही तो होती है जीवन की डगर।


पहले बचपन फिर जवानी,

हर दिन बदली हुई कहानी।


मगर कहानियों के जैसा,

सुखद अंत यहां हर बार नहीं होता।

शतरंज की बिसातों सा है जीवन,

कौनसा प्यादा वजीर को मारेगा, पता नहीं होता।।


मुसीबतें जीवन में,

परीक्षा की तरह होती हैं।

जिनको पार करके ही,

आगे की राह प्रशस्त होती है।।


माना कि जीवन में,

संघर्ष खत्म नहीं होते।

लेकिन एक साथ,

सारे रास्ते कभी बंद नहीं होते।।


हर रात के बाद,

जैसे सवेरा होता है।

जीवन में भी उसी तरह,

सुख दुख का बसेरा होता है।।


गिरना, उठना और फिर से चलना,

मगर उम्मीदों का दामन कभी ना छोड़ना।।


जब आगे बढ़ते रहना,

एक आदत सी हो जाती है।

सुना है तब हौसलों के आगे,

लहरें भी हार जाती हैं।।


संभव है यह कि

जीत पाओ हर बार नहीं।

किंतु जीवन रण में,

हारा वहीं जो लड़ा नहीं।।

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