Monday, 24 April 2023

पढ़ा लिखा समाज

शायद हम ऐसे ही,

पढ़े लिखे समाज से आते हैं।


जहां पर लोग घर मे,

बच्चों को “आप” कहकर बुलाते हैं,

मगर बाहर सड़क पर,

दुगुनी उम्र के लोगों को भी “तू” कहकर चिल्लाते हैं।


इसी पढ़े लिखे समाज में समाज के ठेकेदार,

“बाल मजदूरी” को सामाजिक अपराध बताते हैं,

बाहर जाकर, फिर वही लोग चाय की दुकान पर,

"छोटू दो चाय लाना" आवाज लगाते हैं।


यहां दुनिया के सामने खड़े होकर जो लोग,

नारी सम्मान की बातें करते हैं,

वहीं लोग अपने घर और समाज में,

नारी की मर्यादा को तार तार करते हैं।


खुद के परिवार की सुरक्षा के लिए,

अपना एक्सीडेंटल इंश्योरेंस करवाते हैं,

लेकिन सड़क पर यदि एक्सीडेंट हो जाए,

तो एंबुलेंस बुलाने से पहले मोबाइल से वीडियो बनाते हैं।


यहां पर जिन लोगों में,

अपना वर्चस्व दिखाने की होड़ मची है,

असल में भ्रष्टाचार की मेहंदी भी,

उन्हीं के हाथों में ज्यादा रची है।


अपनों को निसहाय छोड़कर,

दूसरों की मदद के लिए दौड़े जाते हैं,

झूठा दिखावा करने की इस दौड़ में,

हम पढ़े लिखे लोग, मानवता भी भूल जाते हैं।


सच में,

हम ऐसे ही,

पढ़े लिखे समाज से आते हैं। 

2 comments:

  1. Richa Chaudhary24 April 2023 at 22:31

    Bahut hi shandar

    ReplyDelete
  2. as always great lines, fabulous thought and amazing poetry with beautiful collection of words✌️

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